सुनैना के जीवन का यह दौर, जहाँ करियर की चुनौतियाँ और पारिवारिक दबावों का भार उस पर था, एक नए मोड़ की ओर बढ़ रहा था। सुनैना के जीवन में एक नया अध्याय शुरू हो चुका था। उसने वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली थी, और अब उसका सपना था एक सफल एयरहोस्टेस बनने का। वाणिज्य (Commerce) में स्नातक (Graduation) की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एयरहोस्टेस (Airhostess) बनने के लिए एक विमानन अकादमी (Aviation Academy) में प्रशिक्षण लेने के लिए पूरी तरह तैयार थी। उसकी शारीरिक सुंदरता, आकर्षक व्यक्तित्व और संवाद कुशलता उसके इस सपने को पंख दे रहे थे। सुंदर, गोरी, 5.6" ऊँची, और अंग्रेज़ी में धाराप्रवाह होने के साथ-साथ उसकी संवाद-कुशलता भी गजब की थी। ट्रेनिंग के दौरान उसने कई एयरलाइन्स के इंटरव्यू पास कर लिए थे, और उसे विश्वास था कि अब उसका करियर आसमान की ऊँचाइयों को छूने वाला है।
अपनी छह महीने की ट्रेनिंग के दौरान उसने कई एयरलाइंस के इंटरव्यू पास कर लिए थे, और उसका आत्मविश्वास आसमान छू रहा था। लेकिन जैसे ही उसने जेट एयरवेज़ का इंटरव्यू क्लियर किया, तभी जेट एयरवेज़ की स्थिति बिगड़ने लगी, अचानक कंपनी में मंदी का दौर शुरू हो गया। कंपनी ने लागत कम करने के लिए अपने कर्मचारियों को निकाल दिया, और चूंकि सुनैना को अभी नौकरी पर रखा ही नहीं गया था, उसे बताया गया कि सही समय का इंतजार करना पड़ेगा। सुनैना, जो इसी कंपनी में अपनी जगह पक्की मान चुकी थी, अचानक खुद को एक अजीब से खालीपन में महसूस करने लगी। उसका करियर अधर में था, और माता-पिता के शादी के दबाव ने उसकी चिंता को और भी गहरा कर दिया था।
इस बीच, सुनैना के माता-पिता, सुधा जी और आदिशेष जी, उसकी शादी को लेकर चिंतित हो गए थे। सुधा जी और आदिशेष जी को लगता था कि उनकी बेटी की उम्र शादी के लिए सही हो रही है, और जल्द ही उसे एक अच्छा वर मिल जाना चाहिए। रिश्तेदारों ने भी सुनैना के लिए कई प्रस्ताव सुझाने शुरू कर दिए, दूल्हे की सलाह देनी शुरू कर दी थी, और यह दबाव सुनैना के दिल पर भारी पड़ने लगा था। सुनैना खुद को इन बातों से दूर रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ये बातें उसकी रोज़मर्रा की सोच का हिस्सा बनती जा रही थीं। उसे एक रास्ता चाहिए था, एक ऐसा कारण जिससे वह अपने माता-पिता और रिश्तेदारों को यह बता सके कि अभी उसका करियर ही उसकी प्राथमिकता है।
दूसरी ओर, सुनैना का भाई राजीव, जो बचपन से ही एक होनहार छात्र था, IIT में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, परिवार का गौरव बना हुआ था। बचपन से ही सुनैना की राजीव से तुलना होती थी, जो आमतौर पर कई परिवार में होता है। माता-पिता कई बार अंजाने में अपने दो बच्चों में तुलना करके दोनों बच्चों में अराजकता भर देते हैं। हालांकि यह बात उसे कभी-कभी आहत करती थी, लेकिन फिर भी वहअपने छोटे भाई राजीव से बहुत ममता और स्नेह रखती थी, सो उसपर किसी भी तुलना का कभी प्रभाव नहीं पड़ा। सुनैना अपने करियर को लेकर परेशान थी, क्योंकि उसे न केवल अपने लिए एक सही अवसर खोजना था, बल्कि उसे अपने माता-पिता और रिश्तेदारों को भी शादी के बारे में सोचने से रोकने का कोई ठोस कारण देना था।
इसी मानसिक तनाव के दौर में, सुनैना की मुलाकात सोशल मीडिया के उस दौर के प्रसिद्ध प्लेटफॉर्म "Orkut" पर एक लड़के से हुई। उसका नाम था "अमन"। उनकी मुलाकात बस एक साधारण फ्रेंड रिक्वेस्ट से दोस्ती के रूप में शुरू हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह बातचीत गहरी होती गई। अमन, ek 6.1" लंबा, थोड़ा सांवला रंग और उनके ही समुदाय का था। usकी समझदारी और बातचीत में छिपी चतुराई ने सुनैना को प्रभावित किया। सुनैना उस समय एक व्यावसायिक अकादमी में करियर एडवाइजर (Career Advisor) के रूप में काम कर रही थी, खुद को व्यस्त और प्रोफेशनल दुनिया से जुड़ा रखने की कोशिश कर रही थी। इस बातचीत ने उसे थोड़ी राहत दी। अमन ने उसके करियर को लेकर हमेशा सकारात्मक बातें कीं, जिससे सुनैना को यह महसूस होने लगा कि शायद वह सही इंसान है, जो उसकी उलझनों को सुलझा सकता है। उसने कभी भी अपनी फोटो ऑनलाइन साझा नहीं की थी, जब तक कि उसने सुनैना को शादी के लिए प्रस्ताव नहीं दिया।
लेकिन जब अमन ने सुनैना से शादी का प्रस्ताव रखा, तो सुनैना के मन में एक झटका लगा। सुनैना, जो अपने भविष्य के सपनों को लेकर बहुत स्पष्ट थी, ने उसके प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया, क्योंकि उसके सपनों में किसी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जगह नहीं थी। उसका हमेशा से ही एक सेना, नौसेना, या वायुसेना के अधिकारी से शादी करने का सपना था। उसके मन में इन वीर और साहसी व्यक्तियों के प्रति गहरा आकर्षण था, और वह हमेशा चाहती थी कि उसके बच्चे भी भविष्य में उन्हीं मूल्यों और आदर्शों को अपनाएँ और उसे फ़ौजी की पत्नी और माॅं होने का गौरव मिले। सुनैना के सपनों की कतार बड़ी लंबी थी। कहते हैं ज्यादा सपने देखने वाले जिंदगी से ज्यादा अपेक्षाएं रखने लगते हैं, और जब अपेक्षाएं टूटती हैं तो तकलीफ भी बहुत होती है। अमन ने हालांकि हार नहीं मानी। उसने सुनैना से कहा कि वह उसे बेहतर तरीके से जानने का मौका दे और फिर कोई फैसला ले। सुनैना ने पहले मना कर दिया, लेकिन उसने सोचा कि बिना एक-दूसरे को देखे यह निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
समय के साथ, अमन के लगातार आग्रह पर उसने एक शर्त पर उससे बात करना शुरू किया -- वह अब शादी का प्रस्ताव नहीं करेगा, और अगर उसे अमन पसंद आता है, तो वह इस रिश्ते में आगे बढ़ेगी, वरना वह चुपचाप उसकी ज़िंदगी से दूर चला जाएगा। अमन की चतुराई और हेरफेर ने सुनैना को 15 दिनों के भीतर यह यकीन दिला दिया कि शायद वही उसका सच्चा जीवनसाथी है। समय के साथ, अमन की चतुराई और धीरज ने सुनैना को विश्वास दिलाना शुरू कर दिया कि शायद वही उस ke liye सही है। अमन ने उसे यकीन दिलाया कि वह उसके करियर का समर्थन करेगा और उसकी सभी चिंताओं को सुलझाने में मदद करेगा। वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, और सुनैना को लगा कि वह उसके करियर और भविष्य के बारे में सकारात्मक सोच रखता है। सुनैना, जो अपने जीवन के एक ठोस आधार की तलाश में थी, ने सोचा कि शायद उसने अपना जीवनसाथी ढूंढ लिया है। सुनैना ने सोचा कि शायद यही वह इंसान है, जो उसकी ज़िंदगी की सारी उलझनों का हल हो सकता है।
कुछ समय बाद, सुनैना और अमन की मुलाकात की योजना बनी। सुनैना थोड़ी नर्वस थी, लेकिन उसे विश्वास था कि अब उसकी जिंदगी की नई दिशा तय हो रही है। जब वे मिले, तो अमन ठीक वैसा ही निकला, जैसा उसने खुद को बताया था। सुनैना को यह महसूस होने लगा कि शायद उसने सही फैसला लिया है। दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं, और अमन के साथ समय बिताते हुए सुनैना को लगने लगा कि उसकी जिंदगी की समस्याएँ धीरे-धीरे हल हो रही हैं।
असलियत का चेहरा हमेशा कड़वा होता है। एक दिन, जब सुनैना ने अमन से उसके परिवार के बारे में और अधिक जानने की कोशिश की, तो उसे कुछ अनहोनी बातों का पता चला। अमन का परिवार उस स्थिति में नहीं था जैसा उसने सुनैना को बताया था। उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और वित्तीय स्थिति सुनैना के सपनों से मेल नहीं खाती थी। धीरे-धीरे, सुनैना को महसूस होने लगा कि अमन ने उसकी भावनाओं के साथ खेल खेला है। उसका भरोसा टूटने लगा, और वह अब खुद को एक ऐसे जाल में फंसा महसूस कर रही थी, जिससे निकलना आसान नहीं था।
यह जो चमकती दुनिया उसे दिख रही थी, उसकी असलियत बहुत ही कड़वी थी। जल्द ही, वह कड़वा सच उसकी ज़िंदगी में दस्तक देने वाला था, जिससे उसकी खुशियों की दुनिया बिखरने वाली थी। क्या अमन वाकई वैसा व्यक्ति था, जैसा उसने खुद को दिखाया था? क्या सुनैना का करियर और उसकी ज़िंदगी उसी दिशा में जाएगी, जैसा उसने सोचा था? या फिर अमन की वास्तविकता उसके सारे सपनों को बिखेर देगी? आने वाले पल उसकी ज़िंदगी में उथल-पुथल मचाने के लिए तैयार थे।